Sainthwar Rajput History in Hindi

Sainthwar Rajput History in Hindi- Secrets Saithwar Thakur

Sainthwarmall Rajput History in Hindi

सैंथवार शब्द मूलतः संथगार से बना हैं, जो एक प्राचीन क्षत्रिय संघ था। सैंथवार राजपूत अपने आपको राजपूतों में सबसे पवित्र वंश का समझते थे तथा उन्हीं राजपूतो से वैवाहिक सम्बंध रखते थे। जिनकी शुद्धता में उन्हें कोई संदेह नहीं था। अतः वे उन्हीं 36 37 राजपूत वंशों में विवाह करते रहे, जिन्हें बाद में सामूहिक रूप से सिहतवार या सैंथवार-ठाकुर कहा जाने लगा।

इन राजपूतों के वंश का उल्लेख आइन-ए-अकबरी के विभिन्न पृष्ठों पर हैं। (विशेष जानकारी हेतु विशेन वंश दर्पण देखें )

ये राजपूत वंश हैं दास, खागी, ठकुराई, मोहित, कारकोटक, डोवी, महत, सोहरास मंगरास, पुष्कर, बेला, भाटी, उसक बरहजा, बैस, सहज, रावत, कोटहारी, राजपल्ली, खुटहनियां बरवास, पुण्डरी, दर्वे, भक्खर, इत्यादि

डा०राजबली पाण्डेय ने अपनी पुस्तक “गोरखपुर जनपद के क्षत्रियों का इतिहास’ में सैथवारों के सम्बंध में उनकी उत्पत्ति के बारे में एक नया सिद्धान्त प्रतिपादित किया। इन्होनें सैंथवार जाति को प्राचीन मल्ल महाजनपद के संस्थागरिक क्षत्रिय माना, जिन्होनें कालांतर में बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया था।

डा० पाण्डेय के पूर्व किसी पुस्तक में संस्थागारिक शब्द का प्रयोग नहीं किया गया है। वैसे भी सांस्थागारिक एवं सैथवार शब्दों में कोई साम्य न तो उच्चारण से है न ही शब्दों से है। अतः राजवली पाण्डेय का सिद्धान्त स्वीकार्य नहीं हैं।

सैथवार शब्द वस्तुतः सिहत से निर्मित है, जहां इनके नेता राजा मोतीदास शासन करते थे। कृपया सैथवार एवं सिहतवार शब्दों में साम्य देखें ।

औरंगजेब के समय में बहुत से राजपूतों को बलपूर्वक इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए विवश किया गया। इसी क्रम में मझौली के राजा बोध मल्ल को भी बलपूर्वक मुसलमान बनाया गया। ऐसा कहा जाता है कि राजा बोध मल्ल को जजिया कर न देने पर औरंगजेब द्वारा गिरफ्तार कर दरबार में पेश किया गया तथा प्रताडित कर इस्लाम स्वीकार करने के लिए बाध्य किया गया था। उन्हें सलीम नाम दिया गया । दिल्ली दरबार से वापस आने पर उनकी रानी ने उन्हें राजभवन में प्रवेश से वंचित रखा। अतः वह सीमा पर जाकर बस गये तथा अपने नाम सलीम से उस स्थान को सलीमपुर नाम दिया तथा अपनी राजधानी वहीं बनायी, जिसे आजकल सलेमपुर कहा जाता है। उनकी मृत्यु पर उनके बहुत से रिश्तेदारों एवं पट्टीदारों ने उनके ब्रम्हभोज का बहिष्कार किया।

Sainthwar Rajput History in Hindi (Sainthawar-Mall Thakur)

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