ठाकुर और राजपूतों में क्या अंतर है ठाकुर और राजपूतों में क्या अंतर है

राजपूत का शाब्दिक अर्थ होता है – राजपुत्र अर्थात् राजा का पुत्र |सर्वप्रथम राजपूत शब्द का प्रयोग राजा के पुत्रों के लिए किया गया|परन्तु आगे चलकर राजपूत शब्द का प्रयोग राजाओं की जाति के सन्दर्भ में होने लगा |राजपूत मूल रूप से क्षत्रिय वर्ण से संबद्ध थे| जिनके उद्भव का उद्देश्य प्रजा को शत्रुओं से रक्षा करने से था |

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ठाकुर और राजपूतों

यह दोनो केवल आस्पद यानि टाईटिल है। जो समाज के क्षत्रिय वर्ग के लिए उपयोग होता है। वास्तव मे दोनो एक है। जिसे क्षत्रिय समाज के लोगो के लिए उच्चारण सम्मान सहित किया जाता है।

पर अब समाज मे कुछ वर्ग जो सम्मान पाने या अपनी वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए ठाकुर टाईटिल का उपयोग करने लगे है। जिससे भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

ठाकुर और राजपूतों में क्या अंतर है

क्षत्रिय राजपूत और ठाकुर में क्या अंतर है। क्षत्रिय ठाकुर राजपूत क्या अलग होते हैं या फिर एक ही हैं आइए जानते हैं क्षत्रिय राजपूत ठाकुर क्या है।

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